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मन से मुक्ति पार्ट 3

 

*टाइटल:* मन वर्तमान में क्यों नहीं रहता? अतीत और भविष्य की बेचैनी का इलाज











*आर्टिकल:*


*मन से संसार का जन्म कैसे होता है?*


हमारे ऋषियों ने कहा है - मन से संसार का जन्म होता है। मन ने ही जीव को मृत्यु के चंगुल में फंसाया है। अगर मन न हो, तो मृत्यु का डर भी खत्म हो जाये।


वरना परमात्मा तो सब में एक ही है। एक ही चेतना सब में काम कर रही है।


लेकिन मन अलग-अलग दृष्टियों से संसार को अनुभव करता है। किसी चीज में सुख देखता है और किसी में दुःख देखता है। इसी वजह से भेद पैदा होता है।


मन की सबसे बड़ी समस्या ये है कि ये कभी वर्तमान में नहीं रहता। ये हमेशा और पाने के भ्रम में रखता है। अभी ये मिल जाये, फिर वो मिल जाये, इसी दौड़ में जीवन खत्म हो जाता है।


*भूत और भविष्य का रोग*


मन का सारा खेल भूत और भविष्य का है। उसके सारे विचार या तो भूतकाल के होते हैं या भविष्य के।


भूतकाल के विचार पछतावा पैदा करते हैं - काश ऐसा हो जाता, काश ये न होता। और भविष्य के विचार आशा और डर पैदा करते हैं - ऐसा होगा या नहीं होगा।


जिससे मन में हमेशा सुख-दुःख होता रहता है। मन वर्तमान में नहीं रह पाता, क्योंकि वहां वो है ही नहीं। वर्तमान में केवल परमात्मा है।


वो विचारों में है और विचार एक सेकंड भी टिक नहीं पाते। हर सेकंड नया विचार आता है। इसीलिए मन बेचैन है।


वहाँ स्वयं परमात्मा प्रकट हो जाता है, किसी लम्बे अभ्यास के बाद। जब विचार शांत होते हैं, तब जो बचता है, वही परमात्मा है।


*हम साक्षी कैसे हैं?*


एक बहुत गहरी बात समझो - मन के विचार स्वयं के विचार नहीं हैं। क्यों? क्योंकि हम स्वयं एक साक्षी हैं।


जैसे आप आसमान में उड़ते हुए पंछी को देखते हो, आप पंछी नहीं हो, आप देखने वाले हो। वैसे ही आप अपने विचारों को देखते हो, आप विचार नहीं हो।


हमारा स्वरूप परमात्मा का स्वरूप है और उसमें न मन है न संसार, फिर विचार उत्पन्न कभी नहीं हुए। उसी परमात्मा के स्वरूप में मन का स्वरूप मिट जाता है।


वहाँ केवल सत्य है, जिसका अनुभव ही मोक्ष है और परम सुख है। ये सुख मन के सुख के जैसे कुछ समय का नहीं है, ये हमेशा रहने वाला है।


*ये सुख किसे मिलता है?*


ये सबसे खास बात है। ये सुख किसी अमीर या पढ़े-लिखे को ही नहीं मिलता। वो किसी गरीब और लाचार को भी प्राप्त हो सकता है।


उसका धन और मन से कुछ लेना-देना नहीं है। वो डिग्री से नहीं, मन की मुक्ति से ही प्राप्त हो सकता है।


इसलिए कोशिश करो, रोज 10 मिनट आँख बंद करके अपने विचारों को देखो, उनसे लड़ो मत। बस देखते

 रहो। धीरे-धीरे मन शांत होने लगेगा।


---मन से मुक्ति जारी रहेगी 


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