7 दिव्य संकेत कि ये आप अवधूत है - अब मोक्ष निश्चित है | Avdhut Gyan
जीवों का जन्म और मरण का चक्र अनादि काल से चलता रहता है। कई जीव इस माया के बंधन में ऐसे ग्रस्त रहते हैं कि उन्हें यह पता होते हुए भी कि एक दिन मरना है, फिर भी उनके जीवन में कोई बदलाव नहीं आता। वे सत्य से दूर ही रहते हैं और इस संसार की क्षणभंगुर माया में ही लिप्त रहते हैं। उनको न तो संसार ही ठीक से प्राप्त होता है और न ही सत्य की अनुभूति होती है। यही लोक सब कुछ है, परलोक कुछ नहीं है, ऐसा सोचने वाले अज्ञानी लोग बारम्बार इस संसार में जन्मते और मरते रहते हैं।
इस संसार में चंद ही सौभाग्यशाली व्यक्ति होते हैं जो परमात्मा के सत्य स्वरूप का उद्गम और अनुभव करते हैं। उस परम सत्य को प्राप्त करने में ही उनका पूरा जीवन लग जाता है। उन पर संसार की मोह-माया असफल हो जाती है। ये चुनिंदा, विरले लोग ही अपने अंतिम जन्म में होते हैं। ये इस नश्वर शरीर को त्यागकर अपने शुद्ध, सनातन, चैतन्यस्वरूप परमात्मा में स्थित हो जाएंगे, और जन्म-मरण के बंधन से सदा के लिए मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त कर लेंगे।
आइए जानते हैं ऐसे 7 दिव्य संकेत कि ये आपका अंतिम जन्म है।
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1.आध्यात्मिक जागृति
जागृत होना सबसे बड़ा संकेत है कि आप अब संसार के बंधन से मुक्त हो चुके हो। आपने अब शरीर के तल पर भौतिक जीवन नहीं जीना, अब आप आत्मा के तल पर एक आध्यात्मिक जीवन जीने वाले हो। इसके लिए आपमें संतोष का भाव होना चाहिए, संसार में जो भी मिले उसी में संतुष्ट रहना है और जो न मिले उससे मोह नहीं रखना। आपको किसी भी प्रकार की अनावश्यक इच्छा नहीं करनी है, क्योंकि समस्त इच्छाएं ही जन्म-मरण का कारण बनती हैं। आप अब पूर्ण रूप से जागृत हैं, इसलिए शरीर के तल पर मिलने वाले क्षणिक भौतिक सुखों के पीछे अपना अमूल्य मानव जीवन और समय नष्ट न करें। केवल एकमात्र परमात्मा का ही निरंतर चिंतन करते रहें। आपकी किसी से तुलना नहीं की जा सकती, क्योंकि आप स्वयं परमात्मा स्वरूप ही हैं, जो अतुल्य है, अनंत है और अविनाशी है, जिसके समान दूसरा कोई नहीं है।
2.निर्भय होना मृत्य का भय नहीं
आप कभी इस बात से नहीं घबराते कि सामने वाला आपसे ज्यादा ताकतवर है या वो आपको नुकसान पहुँचा सकता है। आप जानते हैं कि इस दुनिया की हर ताकत से बड़ी सिर्फ एक ही ताकत है, और वो है परमात्मा। जब ये बात दिल में बैठ जाती है, तो संसार का कोई भी डर आपको छू नहीं पाता। आपको लोगों का डर नहीं, हालातों का डर नहीं, समाज क्या कहेगा इसका भी डर नहीं। आप मृत्यु से नहीं डरते, क्योंकि आप जानते हैं शरीर नश्वर है। आप प्रताड़ना से भी नहीं डरते, क्योंकि आत्मा को कोई प्रताड़ित नहीं कर सकता। आप हर कदम इस विश्वास के साथ रखते हैं कि परमात्मा आपके साथ है। आप सत्य के मार्ग पर हैं, और सत्य पर चलने वाले को कभी अकेला नहीं छोड़ता परमात्मा। इसलिए आप निर्भय हैं, अडिग हैं, और शांत हैं। यही आपकी सबसे बड़ी शक्ति है और पहचान भी की ये आपका अंतिम जन्म है
3.इच्छाओं का न होना
आपके मन में न किसी से कुछ पाने की आशा है, न आप किसी को पाकर खुद को पूर्ण मानते हैं। आप खालीपन के शिकार भी नहीं हैं। आप कुछ बनने की दौड़ में भी नहीं हैं। एक बार अपनी अंतरात्मा से सच में पूछ कर देखिए, क्या आप सच में किसी को पाना चाहते हैं, जिसके बिना आपको अधूरापन लगे? अगर आपका जवाब 'नहीं' है, तो समझ लीजिए आपने संसार में अपना सारा हिसाब-किताब बंद कर दिया है। अब आप यहाँ लौटने वाले नहीं हैं। इच्छाओं से मुक्त होना, यहाँ तक कि परमात्मा के दर्शन की इच्छा से भी मुक्त हो जाना, यही आपके अंतिम जन्म का प्रमाण है। आपमें एक ऐसी पूर्णता है, जो सिर्फ परमात्मा में होती है, जिसे किसी चीज़ की कमी महसूस नहीं होती कभी।
4.वैराग्य का जन्म
आपके भीतर अब किसी भी चीज़ के प्रति आसक्ति की भावना नहीं बची है। किसी वस्तु को दिल से लगा लेना या किसी व्यक्ति को खो देने से डरना, ये भाव अब आपमें नहीं हैं। आपने संसार को देख लिया है और समझ लिया है। अब संसार की चमक-धमक में आपका मन नहीं लगता, उसकी भागदौड़ आपको खींचती नहीं। आपको किसी भी तरह का प्रलोभन नहीं दिया जा सकता, क्योंकि जिसे सब कुछ मिल गया हो उसे क्या लालच दिया जाए। आप सत्य के इतने करीब आ गए हैं कि झूठ की दुनिया में रहते हुए भी आप उससे अछूते हैं। दुनिया में होना पर दुनिया का आपमें न होना, उससे मोह न होना, यही आपके अंतिम जन्म का सबसे बड़ा प्रमाण है। अब आपके लिए पृथ्वी का राज्य हो या स्वर्ग का सिंहासन, दोनों ही तुच्छ हैं, मिट्टी के समान हैं। क्योंकि आपने उस परमात्मा को पा लिया है, उस परम सत्य को जान लिया है जिसके सामने अनंत कोटि ब्रह्मांड भी रख दिए जाएं तो उनका कोई मोल नहीं। आप पूर्ण हैं, तृप्त हैं, और इसी पूर्णता में ही आपके जीवन की सार्थकता छिपी है, जिसे शब्दों में नहीं बताया जा सकता, बस अनुभव किया जा सकता है हमेशा।
5.सुख दुख से परे
आपके लिए अब बहुत सुख भी और बहुत दुख भी, आपको परमात्मा से अलग नहीं कर सकते।सब सुख प्राप्त हों जाए आप परमात्मा को धन्यवाद देते है या बहुत दुख आए,फिर भी आप परमात्मा को आभार प्रकट करते रहते है दोनों ही आपको छू कर निकल जाते हैं। आप न तो दुखों में दुखी होते हो, न सुखों में बहुत सुखी। क्योंकि आप तो पहले से ही परमसुख में स्थित हो। आप अब अपने अंदर उस स्वरूप में स्थित हो गए हो, जिसे न सुख का पता है, न दुख का। वो अवस्था भोगने से भी बड़ी है, कुछ न मिलने से भी बड़ी है, वो सदा कायम रहने वाली है। उसको कोई मिटा नहीं सकता, कोई छीन नहीं सकता, उसको मिटाना असंभव है। ये गुणधर्म केवल परमात्मा का है, और उस अवधूत का है जो स्वयं परमात्मा स्वरूप हो गया है। आप अब सुख नहीं चाहते, और दुख से भागते भी नहीं। आप सुख-दुख दोनों से परे चले गए हो। आप तो सदा परमसुख में ही हो। आप अब साधारण नहीं रहे, आप अब अवधूत हो।
6. ब्रह्मचारी
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आपको कामवासना से रति भर भी कुछ नहीं चाहिए। आपने अब अपनी इंद्रियों पर पूरा नियंत्रण पा लिया है। आपके मन में किसी स्त्री को पाने का विचार तक नहीं आता। आपके लिए जो भी स्त्री है, वो परमात्मा की ही दी हुई है, आप उसे उसी भाव से देखते हैं। आप किसी भी स्त्री को गलत दृष्टि से नहीं देखते, वासना की दृष्टि से नहीं देखते। आपके लिए स्त्री का समागम किसी सुख का विषय नहीं है, कोई आकर्षण नहीं है। आप इस गहरे सत्य से अवगत हैं कि काल स्वयं स्त्री रूपी जाल में फंसा कर जीवों को नर्कों में डालता है। जो जीव इस मोह में फंस जाता है, वह जन्मों तक भटकता है। जिसका स्त्री से मोह भंग हो गया, वही काल के इस जाल से मुक्त हो पाता है। काम से ग्रस्त लोग आज परमात्मा से इतने दूर हो गए हैं कि वे सिर्फ शरीर के सुखों के लिए शरीरों में ही चक्कर काटते रहते हैं और दुख भोगते रहते है। आप इस सत्य को जानते हैं, इसलिए आप आत्मा के उस सुख में मग्न हैं, जो कभी परमात्मा से दूर नहीं करता और हमेशा एक जैसा ही बना रहता है।
7. संसार के धर्मों के पार
आपमें संसार के धर्मों में अब कोई रुचि नहीं दिखती। आप सब धर्मों में एक ही परमात्मा को देखते हो, एक ही सत्य को जानते हो। आप परमात्मा के वास्तविक स्वरूप को जान चुके हो, इसलिए ये सारे धर्म और उनकी सारी मान्यताएं आपको अब बालक की क्रीड़ा जैसी लगती हैं। जैसे बच्चे खेल-खिलौनों में उलझे रहते हैं, वैसे ही लोग धर्मों में उलझे हैं। आप न मंदिर जाते हैं, न किसी धार्मिक स्थल पर जाने की आपको इच्छा होती है। आपको तीर्थों में जाने का, व्रत-उपवास करने का या किसी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने का कोई शौक नहीं है। आप सबको एक ही परमात्मा की माया जानते हो। आप जानते हो कि उस परमात्मा के लिए न कोई धर्म हो सकता है, न कोई किताब। सारे धर्म, सारी किताबें तो उसी की माया को समझाने के लिए हैं। जो माया से परे चला गया है, वो अवधूत अब अपने आपको किसी धर्म से नहीं जोड़ता, वह सीधा स्वयं परमात्मा से जुड़ जाता है।
अंत में
ये सारे संकेत आपके अवधूत होने का प्रमाण हैं, आपके अंतिम जन्म का प्रमाण हैं। संसार में चुनिंदा लोग ही वास्तव में अवधूत हो पाते हैं। आपमें ये संकेत बाद में भी जन्म ले सकते हैं, इसकी एक प्रक्रिया है। आप अपने जीवन में इनमें से एक संकेत को भी सच्चे दिल से पा लेते हैं, तो समझ लीजिए आप भी अवधूत ही हैं। अवधूत कोई व्यक्ति नहीं है, कोई शरीर नहीं है, वह स्वयं अनंत आत्मा ही है। इसमें होने या बनने की कोई बात ही नहीं है। जो सत्य है, वह पहले से ही है, वह अभी है, इसी पल में है, आपके भीतर ही है।आप ही उससे दूर चले जाते है ।आज के लेख में बस इतना ही आगे अवधूत ज्ञान में ब्लॉग पढ़ते रहे




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